गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

अमर प्रेम (Amar prem)

'written by SHILPI follow on twitter @silpiswati

प्रेम जगत की रीत निराली,थोडी अनोखी थोडी मतवाली,
प्रेम अमिट है,प्रेम अमर है,प्रेम की बोली सबसे प्यारी!!
प्रेम है अर्पण,प्रेम है दर्पण,प्रेम की प्याली अमृत प्याली,
प्रेम दीवानी राधा नाची,मीरा ने पी विष की प्याली!!
प्रेम मे कोई हुआ समर्पण,किसी ने लिखी प्रेम की पाती,
प्रेम की कैसे लिखे परिभाषा,प्रेम ना जाने कोई भाषा!!
अमर प्रेम है निर्मल यमुना,अमर प्रेम की पावन गंगा,
प्रेम की कोई समय न सीमा,प्रेम ना रखे कोई अभिलाषा!!
प्रेम अजर है,प्रेम अमर है,प्रेम है डोरी हर रिश्ते का,
प्रेम तो कर के देखो सबसे,भाव छोड के ऊच-नीच का!!
प्रेम जगत की रीत निराली,थोडी अनोखी थोडी मतवाली,
प्रेम अमिट है,प्रेम अमर है,प्रेम की बोली सबसे प्यारी!!...
......SHILPI
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5 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

Nycccccccc

बेनामी ने कहा…

Superrb bhabi.. :)

Ankit Gupta ने कहा…

Shandar (y)

Ankit Gupta ने कहा…

Shandar (y)

बेनामी ने कहा…

nice ,,,