बुधवार, 20 मई 2015

Aurat [औरत]

ऐ मानुस तू किस भ्रम मे है?
किस घनघोर अहम मे है?
क्यो समझता है,तू खुद को सही?
क्यो तेरा फैसला हो सर्वोपरि?
जिसने साथ दिया तेरा हर मोड पर,
जीवन को देखा जिसने तुझसे जोडकर,
हर पल रखा तेरी भावनाओ का ख्याल,
रखा नही तुझसे कोई विरोधाभास,
तेरे दुख मे भी दिया तुझे सुख का आभास,
कभी ना टूटने दिया तेरा आत्मविश्वास,
तुझमे भरा साहस का अम्बार,
तूने किया उसी को निराश..!!
कोई कहता नारी श्रद्धा है,
पर तूने कहा ओ कुलटा है, ओ हीन है,ओ बुद्धिहीन है,
इतना ही नही ओ चरित्रहीन है...!!
जिसने किया तुझ पर सब कुछ अर्पण, 
तूने कलंकित किया उसी का दामन...!!
जिसने समझा तुझे अपना अभिमान,
तूने किया उसी का अपमान,
करता रहा उस पर प्रहार पर प्रहार,
तन को ही नही मन को भी पहुचाया तूने आघात...!!
ओ चुप रही कुछ न बोली,रखती रही व्रत‌‌-उपवास...!!
अपने रिश्ते का माना तुझको रक्षक पर तू बन गया उसीका भक्षक...!!
ये तूने क्या किया?कैसा ये अन्याय किया?
कैसा तेरा पुरुषत्व है?  नारी को समझता एक वस्तु है.!
करके तो देख प्रेम तू उसको,कर देगी ओ परिपूर्ण तुझको...!!

silpi




2 टिप्‍पणियां:

Sandeep ने कहा…

Nice..sandeep

बेनामी ने कहा…

Its wow Kamal